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*एक मासूम बचा… अब समाज को भी जागना होगा* *नवजात शिशु की सुरक्षा का जायजा लेने एसएनसीयू पहुंची*

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*एक मासूम बचा… अब समाज को भी जागना होगा*
*नवजात शिशु की सुरक्षा का जायजा लेने एसएनसीयू पहुंची*

*बाल कल्याण समिति, समय पर हस्तक्षेप से सुरक्षित हुआ जीवन*

खंडवा। मूंदी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर के खंडहर क्वार्टर में मिले नवजात शिशु की सूचना मिलते ही न्यायपीठ बाल कल्याण समिति, खंडवा ने तत्काल संज्ञान लेकर मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया। समिति के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में सदस्य स्वप्निल जैन एवं रुचि पाटिल जिला अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) पहुंचे, जहां उन्होंने नवजात के स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं देखभाल की विस्तृत जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
एसएनसीयू प्रभारी एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कृष्णा वास्कले ने समिति को बताया कि नवजात पूरी तरह स्वस्थ है तथा चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। वहीं बीएमओ डॉ. आनंद ओनकर ने जानकारी दी कि सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नवजात को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने चिकित्सकीय दल की त्वरित कार्यशैली एवं मानवीय संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि समय पर समन्वित प्रयासों से एक मासूम का जीवन सुरक्षित हो सका। उन्होंने निर्देश दिए कि नवजात की चिकित्सा, सुरक्षा एवं आगे की समस्त वैधानिक प्रक्रिया किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के अनुरूप सुनिश्चित की जाए।
इस अवसर पर अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने कहा, “कोई भी बच्चा अपनी परिस्थितियों का दोषी नहीं होता। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, संरक्षण और स्नेह मिलना उसका अधिकार है। यदि कहीं कोई परित्यक्त या संकटग्रस्त नवजात अथवा बच्चा मिले, तो उसे असहाय न छोड़ें। आपकी एक सूचना और एक संवेदनशील कदम किसी मासूम को नया जीवन दे सकता है।”
उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य समाज की वास्तविक पहचान इस बात से होती है कि वह अपने सबसे कमजोर और असहाय बच्चों की कितनी जिम्मेदारी से रक्षा करता है।
न्यायपीठ बाल कल्याण समिति, खंडवा ने नागरिकों से अपील की कि यदि कहीं कोई परित्यक्त, संकटग्रस्त अथवा संरक्षण की आवश्यकता वाला बच्चा मिले तो तत्काल पुलिस, स्वास्थ्य विभाग या बाल कल्याण समिति को सूचना दें। समिति ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक बच्चे के अधिकारों की रक्षा, सुरक्षित पुनर्वास और सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित करना ही उसका सर्वोच्च दायित्व है।
“आइए, हम केवल दर्शक नहीं, बल्कि हर बच्चे के सुरक्षित बचपन के संरक्षक बनें। क्योंकि हर बचाया गया बचपन, राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव है।”

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